डेढ़ किलोमीटर पहाड़ चढ़कर बच्चों तक पहुंची “सहयोग” की स्वास्थ्य टीम, 442 की जांच; 20 अस्पताल में भर्ती

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‘सहयोग–मिशन जीवन’ से 12 बच्चों को मिली नई जिंदगी, 8 का उपचार जारी; नक्सलग्रस्त आदिवासी क्षेत्रों में रोज 300 किमी से अधिक का सफर

गोंदिया। बालाघाट जिले के नक्सलग्रस्त, पहाड़ी और दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में संक्रमण, कुपोषण और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए सहयोग हॉस्पिटल, गोंदिया की ओर से शुरू की गई ‘सहयोग–मिशन जीवन’ मुहिम उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना स्वास्थ्य टीम गांव-गांव पहुंचकर बच्चों की जांच कर रही है तथा गंभीर और संक्रमित बच्चों को उपचार के लिए गोंदिया लाया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक 442 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इनमें गंभीर अथवा संक्रमित पाए गए 20 बच्चों को सहयोग हॉस्पिटल, गोंदिया में भर्ती कर नि:शुल्क उपचार दिया गया। इनमें से 12 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 8 बच्चों का उपचार जारी है।

बालाघाट जिले के दुर्गम क्षेत्रों में पिछले दो महीनों के दौरान संक्रमणजनित बीमारियों, बालमृत्यु और कुपोषण की स्थिति ने चिंता बढ़ाई है। संक्रमण के कारण अब तक 30 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद दुर्गम क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की चुनौती और गंभीर हो गई है। नक्सलग्रस्त एवं पहाड़ी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण कई परिवारों तक समय पर उपचार पहुंच पाना मुश्किल है। इसी चुनौती को देखते हुए सहयोग हॉस्पिटल की ओर से यह अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान के तहत स्वास्थ्य टीम मोहनपुर, उषाचक्र, कुलपा, माटे, पालागोंदी, लुध, बिटोली, अडोरी, कोरका, कुंडेकसा, देवरबेली, मच्छुरदा, धर्मशाला, बोंदारी, पाथरी, पाथरी टोला, सुंदरवाही, बैगाटोली और बिरसा सहित अनेक दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में पहुंची। यहां बच्चों की स्वास्थ्य जांच के साथ ही ग्रामीण परिवारों को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, उल्टी-दस्त, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी, आकड़ी अथवा अचानक तबीयत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए जागरूक किया गया।

डेढ़ किलोमीटर पहाड़ चढ़कर पहुंची टीम

सुंदरवाही के बैगाटोली में स्वास्थ्य टीम को करीब डेढ़ किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता पार कर बच्चों तक पहुंचना पड़ा। जांच के दौरान चार बच्चे संक्रमित पाए गए। टीम ने उनके परिजनों को तत्काल उपचार के महत्व की जानकारी दी। स्वास्थ्य जागरूकता के अभाव में दो बच्चों के अभिभावकों ने शुरुआत में अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। टीम के लगातार प्रयास और समझाइश के बाद दोनों संक्रमित बच्चों को उपचार के लिए सहयोग हॉस्पिटल, गोंदिया लाया गया।

बच्चों के साथ परिजनों की भी चिंता

सहयोग हॉस्पिटल में गंभीर रूप से बीमार बच्चों को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न जांच, दवाइयां, उपचार और अतिदक्षता उपचार की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों से बच्चों को अस्पताल तक लाने तथा उपचार पूरा होने के बाद उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था भी संस्था की ओर से की जा रही है। उपचार के दौरान बच्चों के माता-पिता के रहने और भोजन की व्यवस्था भी की जाती है।

उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटने वाले बच्चों को कपड़े, चित्रकला की कॉपियां, रंगीन पेंसिल और खाद्य सामग्री दी जा रही है, जबकि उनकी माताओं को साड़ियां भेंट की जा रही हैं। इस तरह अभियान केवल स्वास्थ्य जांच और उपचार तक सीमित न रहकर जरूरतमंद परिवारों को मानवीय आधार पर सहयोग देने का माध्यम भी बन गया है।

अध्यक्ष रामादे ने खुद दुर्गम क्षेत्रों का दौरा किया

सहयोग संस्था के अध्यक्ष जयेशचंद्र रमन रामादे यांच्या सक्रिय मार्गदर्शनाखाली ही मोहीम राबविण्यात येत आहे। रामादे स्वयं स्वास्थ्य टीम के साथ दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने लांजी के शासकीय अस्पताल में बच्चों और संक्रमित मरीजों से मुलाकात कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली तथा खाद्य सामग्री वितरित की। उन्होंने पाथरी में आयोजित रोगनिदान शिविर में भी सहभागिता की और घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद करते हुए अभियान को गति दी।

रामादे ने कहा, “ऐसी आपदा के समय यदि हम लोगों के साथ खड़े नहीं होते तो हमारे होने या न होने का कोई अर्थ नहीं है। बच्चों का जीवन और उन्हें समय पर उपचार मिलना ही सबसे महत्वपूर्ण है।”

चिकित्सकों से लेकर परिवहन टीम तक जुटी

अभियान में सहयोग ग्रुप ऑफ स्कूल्स के संचालक जे.के. लोखंडे, सहयोग हॉस्पिटल, गोंदिया के विभागप्रमुख डॉ. सौरभ वर्धानी तथा AGM डॉ. विश्वेश्वर वेरुलकर के मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के सदस्य सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

क्लिनिकल विभाग में डॉ. अनूप अग्रवाल (बालरोग विशेषज्ञ), डॉ. निकिता कल्लूरी, डॉ. घनश्याम समृत, डॉ. सुशील अंबुले, डॉ. टाटा चोरागडे, डॉ. वीणा तथा डॉ. आर्यन वाघ (RMO) सेवाएं दे रहे हैं।

नर्सिंग विभाग में हेमंत दशहरे, पंकज दशहरे, माधुरी कटरे, वैशाली गनवीर, खुशबू मनेश्वर, प्राची राहंगडाले और अनिकेत वाघमारे कार्यरत हैं।

स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग की ओर से सौरभ मूंदड़ा (जिला प्रमुख), शैलेश वानखेडे, अखिलेश विश्वकर्मा, ताकेश चव्हाण, नितेश्वरी क्षीरसागर और रीना खोबरागड़े (ब्लॉक नोडल अधिकारी) अभियान में योगदान दे रहे हैं।

परिवहन विभाग में संतोष दहारे, दीपेश राहंगडाले, रतनचंद्र ठाकरे और रविंद्र तुपाटे की टीम बच्चों एवं मरीजों को आवश्यकतानुसार अस्पताल तक पहुंचाने और उपचार के बाद घर लौटाने की जिम्मेदारी संभाल रही है।

स्कूल टीम में कमल हटवार (प्रोजेक्ट हेड), युवराज काटकर (COO), सुनील मेश्राम (एक्जीक्यूटिव), अरुण चन्ने, संजय गुर्दे और संग्राम डोंगरवार सक्रिय हैं। आदर्श भारत मिशन की ओर से मनीष डोनोडे सहयोग कर रहे हैं।

नागपुर क्षेत्रीय कार्यालय से विप्लव बोरकर, अमन नागेकर, स्वप्निल वाकोडिकर और रुद्र सेलोकर अभियान में सहभागी हैं। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मचारी, स्वयंसेवक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समन्वय से भी अभियान को मजबूती मिल रही है।

हर दिन 300 किलोमीटर से अधिक का सफर

‘सहयोग–मिशन जीवन’ से जुड़े सदस्य दररोज 300 किलोमीटर से अधिक का प्रवास कर दुर्गम भागों तक पहुंच रहे हैं। अनेक ठिकाणी डोंगराळ आणि खडतर मार्ग पार करून मुलांपर्यंत पोहोचावे लागत आहे। अभियान का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य जांच करना नहीं, बल्कि बीमारी की समय पर पहचान, नि:शुल्क उपचार, स्वास्थ्य जागरूकता और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाना है।

संक्रमित बच्चों के उपचार के लिए हेल्पलाइन 92265 15346 | 83290 70112

सहयोग हॉस्पिटल, गोंदिया की ओर से संक्रमित बच्चों के उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू की गई है। जरूरतमंद परिवार इन नंबरों पर संपर्क कर चिकित्सकीय मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

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